Waste to Wonder: कश्मीर का ये शख्स कचरे से कमाता है लाखों, इसका कारनामा देख पूरा कश्मीर हैरान...

Waste Recycling Unit in Kashmir: कचरें से निकली कीमती चीजों के बारें में तो आपने सुना होगा लेकिन कचरे से पैसा निकलता है ये आप पहली बार सुन रहें होंगे... कश्मीर के एक नौजवान ने इस अफसाने को सच कर दिखाया है... कुलगाम के तारीक अहमद गनी ने ये कारनामा कर दिखाया है.

Waste to Wonder: कश्मीर का ये शख्स कचरे से कमाता है लाखों, इसका कारनामा देख पूरा कश्मीर हैरान...

Jammu and Kashmir: आप अक्सर अपनी रोजनमर्रा की जिंदगी में चीजें खाते पीते है. उनसे निकलने वाले कचरें को डस्टबीन में यूं ही फेंक देते हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है कि आपके उस कचरें से भी कोई लाखों का बिजनेस कर सकता है? हैरान हो गए? लेकिन ये बात बिल्कुल सच है. कुलगाम के तारिक अहमद गनी ने इस नामुमकिन लगने वाली बात को साबित करके दिखाया है. कुलगाम जिले के गढ़महा गांव के रहने वाले MSME UNIT होल्डर तारीक अहमद गनी यूथ स्पेशली एजुकेटिड नौजवानों के लिए एक मिसाल कायम कर रहे हैं...वो कचरें से निकलने वाले प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग कर, सेल्फ एमपलॉयमेन्ट जनरेट कर रहे हैं.

तारीक अहमद ने अपने इस काम के साथ तकरीबन 40 लोगों को जोड़ा हुआ है. ऐसा करके वो कचरे से निकलने वाले प्रोडक्टस को रिसाइकल करके आस पास के एनवॉयरमेन्ट को भी क्लीन करने का काम कर रहे हैं. इसके अलावा हैरान कर देने वाली बात ये है कि तारीक अहमद बिल्कुल भी पढ़े लिखे नहीं है. लेकिन उनके टैलेन्ट का डंका आज पूरे जम्मू कश्मीर में जंगल की आग की तरह फैल रहा है.

तारिक अहमद ने बताया कि वो जम्मू कश्मीर के बाहर एक फैक्ट्री में काम करते थे और उन्हें वहीं से आइडिया मिला की वो क्यों नहीं अपने ही गांव में एक रीसाइक्लिंग यूनिट को डेवलप करें...ताकि वो इस काम से जुड़कर खुद तो पैसे कमाए ही और दूसरों को भी कोई रोजगार दे सकें.अपने आईडिया के इम्पलीमेन्ट के लिए वो डी.आई.सी गये थे.और उनके इरादे को सुनकर कुलगाम के MSME से उन्हें लोन भी मिल गया. जिसके बाद उन्होंने अपना सेल्फ एम्पलॉयमेन्ट का काम शुरू कर दिया. आज वो अपने काम से बहुत खुश हैं. इसी के साथ ही तारीक इस तरह की यूनिट को डेवलप करने के लिए डिस्ट्रीक कुलगाम के इंडस्ट्री सेन्टर का शुक्रिया अदा करते है.

आपको बता दें कि तारीक अहमद गनी के आंखो में सपने है और वो इससे आगे बढ़कर भी बहुत कुछ करना चाहते है. ऐसे में इन्तेजामिया की तरफ से मिलने वाली मदद उनके सपनों को सच करने के साथ ही उनसे जुड़े 40 और लोगों के घर का खर्च चला रही है.
 

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