Wular Lake: मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है वुलर लेक, मौसम के मुताबिक़ बदलता है साइज़

Wular Lake: वुलर झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है. वुलर झील का असली नाम ‘महापद्मसर’ है. यह झील लगभग 8000 मछुआरों की रोज़ी-रोटी का सहारा बनी हुई है.

Wular Lake: मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है वुलर लेक, मौसम के मुताबिक़ बदलता है साइज़

Wular Lake: वैसे तो कश्मीर में कई झील हैं लेकिन यहां कि वुलर झील सब झीलों से अलग है. वुलर झील जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले में मौजूद है. यह झील क़ुदरती रिज़र्वऑयर के तौर पर मशहूर है. झेलम नदी इसमें पानी डालती है और आगे जाकर निकाल भी लेती है. इस झील का साइज़ मौसम के मुताबिक़ बदलता रहता है. यह 30 से 260 वर्ग किलोमीटर के बीच रहती है. आपको बता दें कि वुलर झील भारत की मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है. आइए जानते है वुलर झील के बारे में कुछ ख़ास बातें.

वुलर लेक

वुलर नहीं है असली नाम


यह सुनकर आप चौंक गए होंगे कि वुलर झील का असली नाम वुलर नहीं है तो फिर क्या है. आइए आपको बताते हैं इसका नाम वुलर कैसे पड़ा और क्या है इसका असली नाम. दरअसल, पुराने वक्त में 'महापद्म देवता' इस झील के अधिदेवता थे उनके नाप पर ही इस झील को ‘महापद्मसर’ कहा जाता था. इस झील का साइज़ बड़ी होने की वजह से यहां दोपरह में काफ़ी बड़ी और ख़तरनाक लहरें उठती हैं. संस्कृत में इन क़ुदती हुई लहरों को ‘उल्लल’ कहा जाता है. बाद में इसी नाम को लोग बोलचाल में वुलर कहने लगे तब से इस झील का नाम वुलर झील पड़ गया.

मैन-मेड आइलैंड भी है मौजूद


आपको बता दें कि वुलर झील के पूर्वोत्तरी कोने में एक मैन-मेड आइलैंड भी है जिसका नाम ज़ैनुल है. 15वीं सदी के कश्मीरी इतिहासकार जोनराज के मुताबिक़ यह आइलैंड 1444 में कश्मीर के सुल्तान ज़ैन-उल-आबदीन ने जहाज़ चलाने वालों को वुलर झील में तूफ़ानी हालातों में सहारा देने के लिए बनवाया था. जब यह आइलैंड बनवाया गया था तब वुलर झील का साइज़ काफी बड़ा था और यह झील के बिल्कुल बीचोबीच था, लेकिन अब वुलर का साइज़ कम होने की वजह से यह आइलैंड एक कोने में खंडहर बना पड़ा है.

8000 मछुआरों की रोज़ी-रोटी का सहारा है वुलर झील


वुलर झील में मछलियों की कई प्रजातियां मिलती हैं, जैसे कॉमन कार्प, गुलाबी कंटिया, मास्कीवटोफिश, द नेमाचेलीओस स्पीलस्सई, द क्रासचेलिओस लाटिउस और कई बर्फ़ ट्राउट भी इसमें मिलती हैं. मछली कश्मीर के लोगों का अहम खाना है जिसकी वजह से लगभग 8000 मछुआरे मछली पालन और बेचने से अपनी रोज़ी-रोटी चलाते हैं. इसके अलावा यहां अलग-अलग प्रजातियों के परिंदे भी देखने को मिलते हैं, जैसे- नीले रॉक कबूतर, ओरियल सुनहरा, अल्पाइन स्वी-फ्ट, स्पाकरो हॉक और कम पंजे वाले ईगल. वुलर झील के पास में नाल सरोवर बर्ड सैंक्चुरी भी मौजूद है. अगर आप यहां घूमने का मन बना रहे हैं तो अप्रेल से जून के बीच का वक्त सबसे बेहतरीन होगा.

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